विवेक कुमार
Category: Bhawna
मन चंगा तो कठौती गंगा-मनु कुमारी
एक साधारण गृह से उठी, चेतना की दिव्य ज्वाला। रविदास ने कर्म से तोड़ा, रूढ़ि-बंधन का हर ताला। न मंदिर की सीढ़ी ऊँची, न तीर्थों का आडंबर भारी, मन की…
अश्रु आंखों में लिए-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
आज जाने की घड़ी पर,रो रहा है आसमां। जो अभी परिवार ही हैं,कल रहेंगे पास ना।। राम आए कृष्ण आए,छोड़कर सब चल दिए। देश दुनिया नभ दुखी हैं,अश्रु ऑंखों में…
कहे ऋतुराज अपनों से-एस.के.पूनम
प्रभंजन आज चंचल है, विदाई सर्द की करते। अभी तो शुष्क धीरे से, तुषारापात को हरते। वसंती वात चलने से, प्रकृति के द्वार खुल जाते। भ्रमर जब गुनगुनाते हैं, हजारों…
दोहे – राम किशोर पाठक
दोहे श्री निवास घर में करें, जब तक मिलता मान।अहंकार के जागते, कर जाती प्रस्थान।। श्री पाकर सेवा करें, करिए कुछ उपकार।यही सीख श्री दे रही, करें जगत स्वीकार।। श्री…
सेना हमारी शान- भवानंद सिंह
धनाक्षरी छंद सेना हमारे देश की,आन,बान व शान है,सेवा समर्पण ही इनकी पहचान है। देश रहे सुरक्षित,अखंड और अटूट,इनमें ही इनका अपना स्वाभिमान है। गर्व होता इनपर,देश और समाज को,हमें…
बोलता समय – राम किशोर पाठक
बोलता समय- दोहा छंद गीत शोर शराबा तो सदा, खौलाता है रक्त।अधर जहाँ पर मौन हो, वहाँ बोलता वक्त।। अगर प्रकट करते नहीं, मन के अपने भाव।ध्यान रखें इतना मगर,…
मौसम – राम किशोर पाठक
मौसम – रास छंद गीत२२२२,२२२२,२११२ मौसम भाए, ऋतुपति आए, प्रीत गहे।खुशी मनाते, सब इठलाते, झूम रहे।। कुसुम खिले हैं, गंध मिले हैं, होश हरे।मीत बुलाए, प्रीत जगाए, जोश भरे।।संग गंध…
अनुकरण से सीखना – मनु कुमारी
अनुकरण से सीखना बोलने से पहले बच्चे,आँखों से पढ़ना सीखते हैं।कहने से पहले दुनिया को,करके देखना सीखते हैं। जो देखा, वही सीखा उसने,जो पाया, वही अपनाया।जीवन की पहली पाठशाला,अनुकरण ने…
जातिवाद तो कोढ़ है – राम किशोर पाठक
जातिवाद तो कोढ़ है- दोहा छंद गीत बना दिया शासन जिसे, लाइलाज सा रोग।जातिवाद तो कोढ़ है, कहते ज्ञानी लोग।। जाति पूछते रोज हैं, नियम बद्ध हर रोज।फिर कहते यह…