ठंडी हवा लिए आईमेरी बसंती शाम,इससे प्रभावित हो रहादेश, विदेश और गाम। बसंत पंचमी पर्व परआई बसंती शाम,थोड़ी ठंडी बढ़ गईलोगों को हुआ जुकाम। लोगों को हुआ जुकामचिकित्सक के पास…
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| माँ शारदे की महिमा – मुन्नी कुमारी |
स्व-रचित कविता माँ शारदे की महिमा सुंदर – सुंदर सपना सजाएँ, माँ शारदे की महिमा गाएँ। विद्या से जग को महकाएँ, शुद्ध विचार हृदय में आए। वीणा वादिनी, माँ शारदे,…
आत्मविश्वास से भरे डगर में -अमरनाथ त्रिवेदी
आत्मविश्वास से भरे डगर में , न मन, प्राण , वचन से पीछे जाना । हम सबके दिल के स्नेह हो प्यारे , भविष्य में अपनी पहचान बनाना । मन हर्षित दिल अभिलषित है मेरा , तू अभी से सँभलते जाओ । स्नेहसिक्त करूँ आज तुझे मैं…
आह में देखो-राम किशोर पाठक
लोग हैं खास आह में देखो। कौन है आज डाह में देखो।। कह रहे हैं भला तुम्हें जो भी। दे अगर साथ राह में देखो।। फासले यहाँ दिलों में है।…
प्रेम की पतंग-मनु कुमारी
मकरसंक्रांति आओ, मिलकर मनाते हैं, प्रेम की पतंग पिया हम ,साथ में उड़ाते हैं।। रंग बिरंगी फूलों से हम आशियां को सजाते हैं। प्रेम की पतंग पिया हम साथ में…
मकर संक्रांति-राम किशोर पाठक
पुण्य के पल का समझकर राज, पर्व हम अपना मनाएँ। जाह्नवी जल में नहाकर आज, पर्व हम अपना मनाएँ।। हर्ष से अति पावनी जलधार, सिंधु में थी लीन होती। उस…
मत कर अभी ब्याह मेरी मैया – नीतू रानी
मत कर अभी ब्याह मेरी मैया – नीतू रानी मत कर अभी मेरी ब्याह मेरी मैया, अभी न हुई ब्याह की लायक मेरी मैया। मुझे अभी स्कूल पढ़ने…
एक अभिशाप – विवेक कुमार
एक अभिशाप – विवेक कुमार बेटी ने पूछा बापू से — “इतनी ब्याह की क्या जल्दी?” थोड़ी तो बढ़ जाने दो, अभी तो मैं नादान हूँ, थोड़ी तो ढल…
बाल-विवाह – रत्ना प्रिया
बाल-विवाह – रत्ना प्रिया ब्याह नहीं कोमल कलियों का फूलों-सा खिल जाने दो, बचपन, शिक्षा और यौवन को, मंजिल तो मिल जाने दो । वरदानरूप मिला यह जीवन, बने…
बाल मन – ज्योत्सना वर्द्धन
बाल मन – ज्योत्सना वर्द्धन बाल मन है कितना कोमल सपनों में रहता है उलझा नन्हें ख्वाब बुनती है निंदिया बाल मन है कितना कोमल समय से सब काम…