Category: Bhawna

तुम पर्वतों के समान बनो- गौरव कुमार तिवारीतुम पर्वतों के समान बनो- गौरव कुमार तिवारी

0 Comments 6:05 pm

तुम पर्वतों के समान बनो, आँधियाँ भी मुड़कर लौट जायें   तुम पर्वतों के समान अचल बनो, आँधियाँ भी स्पर्श[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

स्वस्थ होने का पैमाना क्या है? _ धर्मेंद्र कुमार ठाकुरस्वस्थ होने का पैमाना क्या है? _ धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 3:26 pm

स्वस्थ होने का पैमाना क्या है? यहाँ हर व्यक्ति बीमार है, दिखती हर सूरत बेज़ार है। भीड़ तो है इंसानों[...]

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Umesh kumar sinha

हम भारतवासी हैं स्वच्छता अपनाए – उमेश कुमार सिन्हा हम भारतवासी हैं स्वच्छता अपनाए – उमेश कुमार सिन्हा 

0 Comments 10:52 pm

हम भारतवासी हैं स्वच्छता अपनाए – उमेश कुमार सिन्हा  हम भारतवासी हैं, स्वच्छता अपनाए आओ, भारत को स्वस्थ बनाएँ। अपने विद्यालय[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

धरा का गौरव – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरधरा का गौरव – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 10:42 pm

धरा का गौरव – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर इस धरा पर जनम लिया, ये सौभाग्य हमारा है, जिसकी गोदी में पला-बढ़ा,[...]

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Nutan

नवशक्ति-नूतन कुमारी नवशक्ति-नूतन कुमारी 

0 Comments 1:16 pm

हे दुर्गा ! हे चंडिके! हे महामाया! स्त्री रुप है तेरी ही छाया, तेरी नवशक्ति से दुनिया कायम, तूने यह[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

वज्रतुंड – प्राकृतिक वरदान – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरवज्रतुंड – प्राकृतिक वरदान – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:43 pm

वज्रतुंड (प्राकृतिक वरदान) – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर नभ की अनंत गहराइयों से, जो रखता धरती पर नज़र, कुदरत का अनुपम[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

क्रोध का कुनबा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरक्रोध का कुनबा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:21 pm

क्रोध का कुनबा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर भीतर हमारे बैठा है, एक ऐसा परिवार, जो सुख-चैन को डस लेता, कर[...]

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Mritunjay Kumar

हम शिक्षक हैं, हाँ हम शिक्षक हैं! – मृत्युंजय कुमारहम शिक्षक हैं, हाँ हम शिक्षक हैं! – मृत्युंजय कुमार

0 Comments 9:28 pm

हम शिक्षक हैं, हाँ हम शिक्षक हैं! – मृत्युंजय कुमार हम शिक्षक हैं, हाँ हम शिक्षक हैं, देश के नौनिहालों[...]

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मेरी माँ – कुमारी मधुमेरी माँ – कुमारी मधु

0 Comments 5:30 pm

मन के कोने में एक झनकार सी उभरती है, सूखती आंखें,कांपते होठ,फिर भी ममता मयी चेहरा लिए मुझे सुबह शाम[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

भूख की हुंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरभूख की हुंकार – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 11:34 pm

भूख की हुंकार भूख उदर में जब आती है, रणचंडी-सा रूप दिखाती है, धमनियों में लहू उबलता है, नस-नस में[...]

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