पहुंच मंजिल अब मुस्काना है पथ की बाधाओं से डरकर दुख की झंझाओं से थककर हे पथिक ! तुम हार[...]
Category: Bhawna
जिंदगी क्या है?_ गिरीन्द्र मोहन झाजिंदगी क्या है?_ गिरीन्द्र मोहन झा
जिंदगी क्या है? ईश्वर में आस्था रखते हुए स्थितप्रज्ञ और आत्मभाव में स्थित होकर निरंतर कर्म करने का नाम है[...]
मेरी माँ – खुशबू कुमारीमेरी माँ – खुशबू कुमारी
शायद अब माँ बूढ़ी हो रही है, पर मन इस बात को मानने से इन्कार कर रहा है। कभी- कभी[...]
क्रोध की विभीषिका-धर्मेंद्र कुमार ठाकुरक्रोध की विभीषिका-धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
क्रोध की सीमा न होती है, जब यह उमड़ आती है, इसकी ज्वाला धधक-धधक कर, विवेक मानव खा जाती है।[...]
आत्मा की अमरता-कुमारी प्रियंका वर्माआत्मा की अमरता-कुमारी प्रियंका वर्मा
अपने धुन में ही लगे हैं सब किसी को किसी की सोच नहीं समझ सको समझो ,ये जिंदगी बोझ नहीं[...]
बच्चों की शरारत – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरबच्चों की शरारत – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
सुबह सवेरे बजती घंटी, खुल जाते विद्यालय के द्वार, मानो टूट पड़ा हो धरती पर, नन्हें वीरों का संसार। लाखों[...]
मौन का क्रंदनमौन का क्रंदन
मौन का क्रंदन: कब तक खामोश रहेंगे हम?यह कैसी चुप्पी साध रखी है, होठों पर कैसा पहरा है? झंझावातों से[...]
बेटियाँ-आशीष अम्बरबेटियाँ-आशीष अम्बर
बेटियाँ दोनों कुल की मर्यादा है, उनसे ही होता कुल का वैभव । उसी के वश में सृजन सृष्टि है,[...]
डरता हूं -पुरुषोत्तम कुमार डरता हूं -पुरुषोत्तम कुमार
बेटी,तुझे पाने से डरता था आज पाकर खो जाने से डरता हूं। कल तक तेरा बोझ उठाने से डरता था,आज[...]
बेटी-उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक’बेटी-उमेश कुमार सिन्हा ‘निर्देशक’
कर्मठता का प्रतीक बेटी है, बेटी घर की शान। माँ की गृहस्थी में सहयोगिनी, पापा की पगड़ी की शान। एक[...]
