आत्मचिंतन से निकली ऊर्जा
ज़ब भोग का नाश कराती है ।
तभी योग उमड़ता जीवन में ,
यह शरीर से रोग शोक भगाती है ।
सिर्फ बैठे रहकर हम जीवन खोते,
तभी जिंदगी में रोग लगाते हैं ।
आएँ सब मिल इसे सदा अपनाएँ ,
योग से ही तन मन स्वस्थ बनाते हैं ।
योग की अपनी महिमा है ,
योग ही रोग भगाता है ।
सही – सही जीवन को जीने में,
यह सही राह बताता है ।
मन से तन को जो जोड़े ,
वही तो योग कहलाता है ।
जीवन में खुशियाँ जो भर दे ,,
तभी तो मन भी यह बहलाता है ।
खुशियाँ ही खुशियाँ हम पाएँगे ,
ज़ब योग कभी न छोड़ेंगे ।
अपने जीवन को सदा- सदा ही ,
तभी योग की और हम मोड़ेंगे ।
योग दिवस की पूर्व संध्या पर
सबको याद दिलाने आया हूँ ।
इससे इतनी खुशी मिली है ,
तभी तो इससे सदा जुड़ पाया हूँ ।
कोई दिन कभी ऐसा न गुजरे ,
जिस दिन योग करना भूल जाएँ ।.
अपने मन को वश में कर लें,
सारी जिंदगी तभी हम खुशियाँ पाएँ ।
जीवन में नित योग कर ही ,
रोग शोक से दूर रहते हैं ।
अपनी ऊर्जा के प्रवाह को ,
सारे शरीर में तभी हम गहते हैं ।
आएँ हम सब मिलकर हर वर्ष ,
योग दिवस को सफल बनाएँ ।
होगा कल्याण इससे पूरे विश्व का ,
नित नव मंगल मोद मनाएँ ।
अमरनाथ त्रिवेदी
पूर्व प्रधानाध्यापक
उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैंगरा
प्रखंड बंदरा , जिला मुजफ्फरपुर

