एक ही सार है जीवन का ,
है एक ही जीवन का मर्म ।
मिलकर संग चलेंगे गर तो,
झूमेंगे फिर ये धरा – गगन ।
बूँद-बूँद से है बनती नदियाँ ,
तिनका-तिनका बनता नीड़ ।
एक-एक फूल से बनती माला,
एकाकी हो बढ़ जाती पीर ।
प्रेम, दया संग सजाएँ उपवन ,
होगा तभी सार्थक यह जीवन
विश्वबंधुत्व का ध्यान रखें हम,
हर्षित, पुलकित होगा हर आँगन।
आओ एकता की शक्ति दिखलाएँ,
स्वर्णिम- सा एक अध्याय बनाएँ।
तजकर राग-द्वेष संग ईर्ष्या- क्लेश,
धराधाम का कण-कण महकाएँ।
एकता करती हर दुःखों का अंत,
फैली कीर्ति उनकी दिक् दिगंत।
है राष्ट्र एकता का आधार यही
करूँ मन समर्पित जीवनपर्यन्त।
बेबी अर्चना
मध्य विद्यालय कुआड़ी
प्रखंडकुर्साकांटा जिला अररिया

