पद्यपंकज दिवस,हिंदी दिवस हिंदी—सिर्फ एक दिवस नहीं-रिन्जु कुमारी

हिंदी—सिर्फ एक दिवस नहीं-रिन्जु कुमारी


Rinju Singh

हिंदी को केवल हिंदी दिवस पर,

याद करना भी कैसी विडंबना है,

जो हर धड़कन में बसती है,

उसे एक दिन में क्यों बाँधना है?

जब बच्चा जन्म लेकर

पहली बार कुछ बोलता है,

माँ की गोद में पलकर

अपनी पहली भाषा चुनता है।

वह ‘माँ’ कहकर पुकारता है,

उसी में अपना भाव जताता है,

हँसी हो, आँसू हों या खुशियाँ,

हिंदी में ही तो बतलाता है।

फिर क्यों हिंदी का सम्मान

सिर्फ एक दिवस तक सीमित हो?

क्यों अपनी ही भाषा बोलने में

कभी-कभी हमें संकोच हो?

हिंदी केवल भाषा नहीं,

हमारी मिट्टी की पहचान है,

हमारे संस्कारों की खुशबू,

हमारे मन की मुस्कान है।

हिंदी को एक दिन नहीं,

हर दिन सम्मान चाहिए—

क्योंकि हिंदी दिवस मनाने से अधिक,

हिंदी को जीना जरूरी है।

रिन्जु कुमारी 

प्राथमिक विद्यालय

पासवान टोला किरकिचिया 

फारबिसगंज 

अररिया 

बिहार

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