हुआ धन्य अयोध्या नगरी ,
श्री राम लिए अवतार ।
राजा दशरथ हुए निहाल ,
बाजे बधैया चहुंओर।
मुखड़ा चंद्र सामान,
प्रगट भए श्रीराम ।
करी विनती मात कौशल्या,
प्रभु कीजिए शिशु लीला ।
मात वचन सुनी बाल रूप ,
धर रोदन ठाना भगवाना ।
बड़े भए परिजन सुखदाई,
गुरु गृह गए पढ़न रघुराई।
श्याम वर्ण तेज पुंज,
कंधे धनुष सोहे ।
राजा जनक नेवत पठाई,
गुरु वशिष्ठ संग गए द्वि बालक।
शिव धनु तोड़ जानकी पाए ,
राजतिलक सुनी मंथरा दासी।
अपनी कुटिल चाल चलाई ,
कैकेई को वचन याद दिला।
चौदह वर्ष वनवास कराई,
पिता आज्ञा पालन कर ।
वन को गए श्रीराम ,
छल से रावण किया सीता हरण ।
दशानन पर विजय प्राप्त कर ,
अयोध्या आए भगवान।
गुरु वशिष्ठ किए राज्याभिषेक ,
नगरी हुआ धन-धान्य ।
अपना आदर्श स्थापित कर,
मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए श्रीराम।
ब्यूटी कुमारी
प्रधान शिक्षक
दलसिंहसराय,
समस्तीपुर

