निश्चल प्रेम – ज्योत्सना वर्द्धन
राधा सा निश्चल प्रेम मेरा,
क्या कृष्ण सा साथ निभाओगे?
क्या तुम आओगे?
प्रेम की प्रीत लगाओगे,
संग- संग तुम रह जाओगे,
क्या वादे सारे निभाओगे?
हर्षित मन के पीछे तुम,
भंवरा बन आए थे,
फिर एक नन्हा घोंसला बना,
एक आस की लौ जलाए थे।
क्या शीतलता रास आयी नहीं?
चंद सिक्कों पर ही बिक गए!
कृष्ण बनो जब प्रेम में हो,
क्यों रावण सा रास रचाते हो?
मैं राधा बन रह जाऊँगी,
बस तुमसे प्रीत निभाऊँगी।
मैं राधा बन रह जाऊँगी,
बस तुमसे प्रीत निभाऊँगी।
बस साथ तुम्हारा बना रहे,
छल-कपट से जीवन दूर रहे,
सच्चाई बस आधार बने,
सच्चाई बस आधार बने।
बस तुम भी मन की बात कहो,
बस सारी सच्ची बात कहो।
राधा सा निश्चल प्रेम मेरा,
क्या कृष्ण सा साथ निभाओगे?
ज्योत्सना वर्द्धन
उत्क्रमित मध्य विद्यालय पहाड़ चक, मोतीपुर, मुजफ्फरपुफर

