जन्माष्टमी मनाना सार्थक है – रिन्जु कुमारी
क्या सच में जन्माष्टमी मनाना सार्थक है?
क्या केवल मंदिर सजाने से,
और कन्हैया का रूप बनाने से,
सार्थक हो जाएगी जन्माष्टमी?
क्या दीप जलाने और गीत गाने से
हर अँधियारा मिट जाएगा?
आज भी राहों में भय है,
मासूम बच्चियों की आँखों में डर है,
नारी की अस्मिता पर उठते प्रश्न,
मानवता क्यों आज बेखबर है?
हे कन्हैया! फिर आओ तुम,
पर केवल मुकुट सजाकर नहीं,
हर उस हृदय में जन्म लो
जो अन्याय के आगे झुके नहीं।
आओ किसी अवतार के रूप में,
हर मासूम की रक्षा करने,
हर बेटी को निर्भय जीवन देने,
हर नारी का सम्मान करने।
पर शायद हमें यह समझना होगा—
कन्हैया बाहर से ही आएँ, जरूरी नहीं,
उनके साहस, प्रेम और न्याय को
अपने भीतर जगाएँ, यही सही।
जिस दिन हर बेटी सुरक्षित होगी,
हर नारी को सम्मान मिलेगा,
जिस दिन अन्याय के विरुद्ध
हर इंसान मजबूती से खड़ा मिलेगा—
उस दिन सच में सार्थक होगी जन्माष्टमी,
उस दिन कन्हैया फिर आएँगे,
हमारे कर्मों, हमारे संस्कारों में,
और इस दुनिया को सुंदर बनाएँगे।
रिन्जु कुमारी
प्राथमिक विद्यालय पासवान टोला किरकिचिया
प्रखंड फारबिसगंज
जिला अररिया

