पद्यपंकज Aashcharya,sandeshparak,Shakshanik शशि नभ मंडल, आए कैसे-राम किशोर पाठक

शशि नभ मंडल, आए कैसे-राम किशोर पाठक


Ram Kishore Pathak

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शशि नभ मंडल, आए कैसे?
नित छवि नूतन, पाए कैसे?

हरपल शीतल, दे अंजोरा।
तन रखता निज, गोरा-गोरा।।
हम सबका वह, कैसा मामा?
विधु उपमा पर, क्यों हंगामा?
रस निशिनायक, लाए कैसे?
शशि नभ मंडल, आए कैसे?०१।।

दिनभर आखिर, सोते क्यों हैं।
वृहद कभी तन, छोटे क्यों हैं।
धवल कलाधर, कैसे तोलूँ?
अमर सुधाकर, क्यों मैं बोलूँ?
ललित अमीनिधि, छाए कैसे?
शशि नभ मंडल, आए कैसे?०२।।

वह सुत सागर, क्यों आकाशी?
तिमिर विनाशक, है क्या आशी?
सब जन मोहित, क्यों हैं बोलो?
शिव सिर शोभित, क्यों हैं बोलो?
निशि दिन शंकर, भाए कैसे?
शशि नभ मंडल, आए कैसे?०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- ९८३५२३२९७८

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