Author: madhukumari

बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

0 Comments 10:59 am

होकर मगन गगन के नीचे, दौड़ रहे ये बच्चे हैं। जिन्हें देखकर वयोवृद्ध सब,अंतर मन से नच्चे हैं।। हरियाली के[...]

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Jainendra

काम का महत्व-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’काम का महत्व-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 10:10 am

सीखाते कुरान-गीता, गुरुजन माता-पिता, हमें ये जीवन नहीं, मिला है आराम को। मजदूर किसानों को मिलता विश्राम नहीं, सुबह सबेरे[...]

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बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

0 Comments 6:58 pm

आजादी आधार, मिली जब से भारत को। दौड़ पड़े सबलोग,विनत हुए सु-स्वागत को।। सुनकर विस्मित मान,रहे हैं खुद को प्राणी।[...]

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Ram Kishore Pathak

फिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठकफिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठक

0 Comments 4:06 pm

कहती अम्मा मुझको लल्ला। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।। कान्हा थें कितना ही नटखट। माखन मिसरी खाते चटपट।। घूमा[...]

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रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

0 Comments 7:07 pm

बोल अरे क ख या ग घ,घोल मिठापन डाल रही है। बैठ गई जब सम्मुख माॅं तब,बालक ज्ञान प्रक्षाल रही[...]

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Ram Kishore Pathak

आओ हे बनवारी- राम किशोर पाठक आओ हे बनवारी- राम किशोर पाठक 

0 Comments 5:47 pm

आओ हे बनवारी- गीत हरने कष्ट हमारी। आओ हे बनवारी।। मेरा धर्म बचाना। करना नहीं बहाना।। आस रखी दुखियारी। आओ[...]

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Ram Kishore Pathak

सर्दी- कहमुकरी- राम किशोर पाठक सर्दी- कहमुकरी- राम किशोर पाठक 

0 Comments 4:18 pm

सर्दी – कहमुकरी स्पर्श सदा कंपित है करती। रोम-रोम में सिहरन भरती।। जैसे वह हमसे बेदर्दी। क्या सखि? साजन! न[...]

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बलहीनन का बस पीड़ हरो-रामपाल प्रसाद सिंहअनजान बलहीनन का बस पीड़ हरो-रामपाल प्रसाद सिंहअनजान 

0 Comments 4:12 pm

हम जान रहे कर क्या सकते, तुम तो न मुझे इनकार करो। शुभ कर्म किए शुभ धर्म किए,मम श्वेत मकान[...]

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