Author: madhukumari

Ram Kishore Pathak

शरण गहूँ दिन-रात – राम किशोर पाठकशरण गहूँ दिन-रात – राम किशोर पाठक

0 Comments 1:41 pm

ध्यान लगा मैं कर सकूँ, रचना की बरसात। भजन करूँ नित मातु की, शरण गहूँ दिन-रात।। शब्द पुष्प के हार[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

ठंड का प्रभाव-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ठंड का प्रभाव-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 1:32 pm

तापमान गिरने से मौसम बदलने से *धीरे-धीरे ठंडक का, बढ़ता प्रभाव है।* पंछियाँ तो घोसले में- रहतीं दुबककर, *पशु छिप[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

मैं राष्ट्र धर्म को अपनाया – राम किशोर पाठक मैं राष्ट्र धर्म को अपनाया – राम किशोर पाठक 

0 Comments 1:21 pm

मैं बहती बन जाऊँ सरिता  मैं जीवन में लाऊँ ललिता  मैं झुंड यहाँ देखूँ कितने मैं ढूँढ रहा खुद के[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

आसरा पास बैठी है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ आसरा पास बैठी है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

0 Comments 1:31 pm

  खींचती मर्म की रेखा।। जन्म लेते जिसे देखा। आज माॅं खास बैठी है। आसरा पास बैठी है।। दर्द होने[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

हमें नहीं डरना-राम किशोर पाठकहमें नहीं डरना-राम किशोर पाठक

0 Comments 1:35 pm

कभी नहीं रुकते, आगे है बढ़ना। सहज भाव कहते, हमें नहीं डरना।। आती है बाधा, अक्सर राहों में। ताकत कर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Girindra Mohan Jha

बचपन-गिरीन्द्र मोहन झाबचपन-गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 11:09 pm

खेलना, मस्ती करना, बड़े-बड़े ख्वाब देखना, पढ़ाई करना, जिज्ञासु प्रवृत्ति का हो जाना, बड़े-बड़े सपने देखना, पर धरातल से सदा[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Girindra Mohan Jha

संस्कार-गिरीन्द्र मोहन झासंस्कार-गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 10:17 am

कहता हूं, व्यक्ति अपने संस्कार का ही होता है गुलाम, सुसंस्कारवश अच्छा काम करता, कुसंस्कार से बुरा काम, अच्छा संस्कार[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

मुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठकमुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठक

0 Comments 1:44 pm

अम्मा कुछ मुझको बतलाओ। मुझको कान्हा आज बनाओ। जो चाहूँ वह दे दो मुझको। ऐसे कभी नहीं तड़पाओ।। मैं भी[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

ग्रामीण परिवेश-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ग्रामीण परिवेश-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 10:58 am

सुबह सवेरे जाग,  कबूतर और काग,  धूप सेकने को बैठी, पक्षियांँ मुंडेर पर। फसलें खेतों से जब  किसानों के घर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें