दीप जलाना – कुंडलिया दीप जलाना आज है, जगमग करना व्योम। पुलकित पावन हो हृदय, प्रेम भरा हर रोम।। प्रेम[...]
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
दीप ज्योति नमो नमः।दीप ज्योति नमो नमः।
दीप ज्योति नमो नमः। यत्र नास्ति दीपं तत्र वा तिमिरं। आगमनेसतत्र ज्योति कुतो वा तिमिरं।। यतो दीपं ततो धर्म:। दीप[...]
रामायण – राम किशोर पाठक रामायण – राम किशोर पाठक
आओ चिंतन कर लें थोड़ा, जो खुद गढ़ते हैं। गाथा सुंदर रामायण की, हम-सब पढ़ते हैं।। नारायण होकर जब नर[...]
कैकेई का त्याग – विधाता छंद गीत – राम किशोर पाठककैकेई का त्याग – विधाता छंद गीत – राम किशोर पाठक
कैकेई का त्याग- विधाता छंद गीत जगत कल्याण के कारण, किया विष पान त्रिपुरारी। पुनः दुनिया बचाने को, किया है[...]
दीपावली का त्योहार – आशीष अम्बरदीपावली का त्योहार – आशीष अम्बर
दीपावली का त्योहार आया, संग में अपने खुशियाँ लाया । रंगोली से घर को सजायेंगे, मिलकर खुशियाँ खूब मनायेंगे ।[...]
ऐ जिंदगी – रश्मि मिश्राऐ जिंदगी – रश्मि मिश्रा
ऐ जिंदगी जिसे तुझे जीना आ गया उसके लिए तू सरल बहुत है ,पर उनके लिए तू कठिन बहुत है,[...]
बचपन – बाल गीत – राम किशोर पाठकबचपन – बाल गीत – राम किशोर पाठक
बच्चे मिलकर जश्न मनाए। धमा चौकड़ी धूम मचाए।। अनुपम हर क्षण है जीवन का। सफर सुहाना है बचपन[...]
अभिनंदन – राम किशोर पाठकअभिनंदन – राम किशोर पाठक
सतत हो अभिनंदन राम का। सहज हो जप सुंदर नाम का।। सुलभ हो पल जीवन धाम का। सहज हो फल[...]
जीवन सुंदर सरस – महामंगला छंद गीत, राम किशोर पाठकजीवन सुंदर सरस – महामंगला छंद गीत, राम किशोर पाठक
जीवन सुंदर सरस, लगता हरपल खास। कर्म करे जो सतत, होता नहीं उदास।। हारा मन कब सफल, मन के जीते[...]
शरद पूर्णिमा, रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’शरद पूर्णिमा, रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
विधाता छंदधारित मुक्तक शरद पूर्णिमा कहीं संगम कहीं तीरथ, धरा पर पुण्य बहते हैं, मगर जो आज देखेंगे, कहेंगे व्यर्थ[...]
