नशे के गर्त में डूब रही है, आज की युवा पीढ़ी। कर्णधार कहलाते देश के, विकास की है जो सीढ़ी।[...]
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हे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठकहे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठक
हे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठक हे सखी! मुझे बतलाओ। कैसे रहूँ बिना साजन के, बैठी घर[...]
पगडंडी पर भागे ऐसे – रामपाल प्रसाद सिंह अनजानपगडंडी पर भागे ऐसे – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
पगडंडी पर भागे ऐसे, बालक सुलभ सलोने हैं। नन्हीं-नन्हे साथ-साथ हैं, अनुभव नए पिरोने हैं। पगडंडी भी स्वागत करने, हरियाली[...]
संविधान- लावणी छंद – राम किशोर पाठकसंविधान- लावणी छंद – राम किशोर पाठक
संविधान- लावणी छंद – राम किशोर पाठक नीति नियम का ग्रंथ यही है, जिसके सन्मुख समरस रहते। देश चलाते हैं[...]
जिए जा रहा हूॅं- गजल राम किशोर पाठकजिए जा रहा हूॅं- गजल राम किशोर पाठक
१२२-१२२-१२२-१२२ उदासी छुपाकर जिए जा रहा हूँ। तभी तो लबों को सिए जा रहा हूँ।। निगाहें जिन्हें ढूँढती है[...]
जीवन में शिक्षा का स्थान – अमरनाथ त्रिवेदीजीवन में शिक्षा का स्थान – अमरनाथ त्रिवेदी
मन से न कभी भाग पाएँगे, सदा शिक्षा का अलख जगाएँगे। जीवन से शिक्षा का इतना नाता, इसके बगैर न[...]
मुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठकमुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठक
अम्मा कुछ मुझको बतलाओ। मुझको कान्हा आज बनाओ। जो चाहूँ वह दे दो मुझको। ऐसे कभी नहीं तड़पाओ।। मैं भी[...]
बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
होकर मगन गगन के नीचे, दौड़ रहे ये बच्चे हैं। जिन्हें देखकर वयोवृद्ध सब,अंतर मन से नच्चे हैं।। हरियाली के[...]
लेखनी-एस.के.पूनमलेखनी-एस.के.पूनम
सोच रही है लेखनी, कहाँ से प्रारंभ करुँ, फँस गया विचारों में,हो न जाए परिहास। तूलिका भी डर रही, कागज[...]
शिक्षक – कहमुकरी राम किशोर पाठकशिक्षक – कहमुकरी राम किशोर पाठक
शिक्षक – कहमुकरी सबके हित को तत्पर रहता। अपने हक में कभी न कहता।। दोष गिनाते बने समीक्षक। क्या सखि?[...]
