Category: Shakshanik

नशे में युवा पीढ़ी – बिंदु अग्रवालनशे में युवा पीढ़ी – बिंदु अग्रवाल

0 Comments 10:29 pm

नशे के गर्त में डूब रही है, आज की युवा पीढ़ी। कर्णधार कहलाते देश के, विकास की है जो सीढ़ी।[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

हे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठकहे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 10:23 pm

हे सखी! – पथिका छंद – राम किशोर पाठक हे सखी! मुझे बतलाओ। कैसे रहूँ बिना साजन के, बैठी घर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

पगडंडी पर भागे ऐसे – रामपाल प्रसाद सिंह अनजानपगडंडी पर भागे ऐसे – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

0 Comments 10:19 pm

पगडंडी पर भागे ऐसे, बालक सुलभ सलोने हैं। नन्हीं-नन्हे साथ-साथ हैं, अनुभव नए पिरोने हैं। पगडंडी भी स्वागत करने, हरियाली[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

संविधान- लावणी छंद – राम किशोर पाठकसंविधान- लावणी छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 10:13 pm

संविधान- लावणी छंद – राम किशोर पाठक नीति नियम का ग्रंथ यही है, जिसके सन्मुख समरस रहते। देश चलाते हैं[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

जिए जा रहा हूॅं- गजल  राम किशोर पाठकजिए जा रहा हूॅं- गजल  राम किशोर पाठक

0 Comments 10:04 pm

  १२२-१२२-१२२-१२२ उदासी छुपाकर जिए जा रहा हूँ। तभी तो लबों को सिए जा रहा हूँ।। निगाहें जिन्हें ढूँढती है[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

जीवन में शिक्षा का स्थान – अमरनाथ त्रिवेदीजीवन में शिक्षा का स्थान – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 9:58 pm

मन से न कभी भाग पाएँगे, सदा शिक्षा का अलख जगाएँगे। जीवन से शिक्षा का इतना नाता, इसके बगैर न[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

मुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठकमुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठक

0 Comments 1:44 pm

अम्मा कुछ मुझको बतलाओ। मुझको कान्हा आज बनाओ। जो चाहूँ वह दे दो मुझको। ऐसे कभी नहीं तड़पाओ।। मैं भी[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

0 Comments 10:59 am

होकर मगन गगन के नीचे, दौड़ रहे ये बच्चे हैं। जिन्हें देखकर वयोवृद्ध सब,अंतर मन से नच्चे हैं।। हरियाली के[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishore Pathak

शिक्षक – कहमुकरी राम किशोर पाठकशिक्षक – कहमुकरी राम किशोर पाठक

0 Comments 8:05 pm

शिक्षक – कहमुकरी सबके हित को तत्पर रहता। अपने हक में कभी न कहता।। दोष गिनाते बने समीक्षक। क्या सखि?[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें