हे मुरारी! अब लाज बचाओ ये कैसी विपदा आन पड़ी, चहुंँओर अंधियारा छाया है, अपने ही बने भक्षकगण से, हे[...]
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दुनिया हैरान है – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’दुनिया हैरान है – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
जीव-जंतु परेशान, बढ़ रहा तापमान, अब भी तो चेतो भाई, कहाँ तेरा ध्यान है? धरती सिमट रही, आबादी से पट[...]
लोक-लज्जा- अवनीश कुमारलोक-लज्जा- अवनीश कुमार
ख़ून से लथपथ एक काया. फ़ेंका गया था लहरताल मे उपजी झाड़ियों मे रो रहा था शिशु बिलख-बिलख कर ईश्वरीय[...]
बेचारा मजदूर- नीतू रानीबेचारा मजदूर- नीतू रानी
बेचारा मजदूर दिनभर करता मजदूरी परिवार से रहता दूर, बेचारा मजदूर। कभी खेत में काम है करता कभी सड़कों पर[...]
कैसी ये पहेलियाँ- एस.के.पूनमकैसी ये पहेलियाँ- एस.के.पूनम
मनहरण घनाक्षरी (कैसी ये पहेलियाँ) पतझड़ में पत्तियां, दूर चली उड़कर, शांत मौन नभचर,सूनी-सूनी डालियाँ। कलियाँ भी मुर्झाकर, बिखरी है[...]
नारी क्यों मजबूर हुई – नीतू रानीनारी क्यों मजबूर हुई – नीतू रानी
नारी क्यों मजबूर हुई जब उसपर अत्याचार क्रूर हुई, तभी नारी मजबूर हुई। नारी पर पुरुषों का बज्र प्रहार, नारी[...]
बाल मजदूर- अश्मजा प्रियदर्शिनीबाल मजदूर- अश्मजा प्रियदर्शिनी
अपने बचपन को खोता कितना वह लाचार। मलिन सी काया,दुर्बल छवि,जीर्ण- शीर्ण आकार। अत्यंत आवश्यक प्यासे को पानी भूखे को[...]
डाॅक्टर के पास- नीतू रानीडाॅक्टर के पास- नीतू रानी
विषय-जाति गणना जाति गणना कार्य करते हुए लगी ठंड , दाहिने हाथ और पीठ में उठा भयानक दर्द। इसी भयानक[...]
शराबी पति- नीतू रानीशराबी पति- नीतू रानी
विषय-शराब तर्ज-सजनवां बैरी हो गईल हमार। सजनवां शराबी हो गईल बीमार कतौ सेअ आबै हमरा ऊ मारै, दैय बीछ –[...]
नारी व्यथा- अमरनाथ त्रिवेदीनारी व्यथा- अमरनाथ त्रिवेदी
आज के भटकते समाज मे , नारी की स्थिति क्या होती है ? दिन -रात निज कर्म में रह ,[...]
