एक शिक्षक ही तो है – कार्तिक कुमार
तुझे राह दिखाने वाला,
तेरी भूल बताने वाला,
अंधियारे में दीप जलाकर,
सही दिशा समझाने वाला।
तुझे विद्वान बनाने वाला,
ज्ञान का दीप जलाने वाला,
तेरी हर छोटी कोशिश को,
बड़ी उड़ान दिलाने वाला।
गिरकर जब तू हारने लगे,
हिम्मत तुझमें भरने वाला,
तेरी मंज़िल दूर हो फिर भी,
कदम-कदम पर चलने वाला।
तेरे सपनों को पंख लगाकर,
तुझे ऊँचाई पर ले जाने वाला,
जीवन की हर कठिन घड़ी में,
सच्चा साथ निभाने वाला।
ऐसा प्यारा, ऐसा न्यारा,
रिश्ता सबसे महान है,
शिष्य के जीवन को सँवारना,
गुरु का सबसे बड़ा सम्मान है।
माँ-बाप के बाद जो जीवन में,
नई राह दिखलाता है,
अज्ञान मिटाकर ज्ञान का सूरज,
मन में रोज उगाता है।
न धन चाहे, न मान चाहे,
बस शिष्य सफल हो जाए,
गुरु के चेहरे की मुस्कान,
शिष्य की जीत से आए।
तुझे राह दिखाने वाला,
तुझे गलती बताने वाला,
मुझे विद्वान बनाने वाला,
तुझे ऊँचाई पर ले जाने वाला—
एक शिक्षक है, एक शिक्षक है,
एक शिक्षक ही तो है।
प्रस्तुति कार्तिक कुमार
मध्य विद्यालय कटरमाला गोरौल वैशाली

