होली का रंग-कार्तिक कुमार

बच्चों, बुद्ध, महिला, पुरुष,

युवती-युवक सब मिलें भरपूर।

होली का रंग सबको भाए,

प्रेम का संदेश जग में फैलाए।

नन्हे बच्चे हँसते-गाते,

पिचकारी से रंग बरसाते।

युवक-युवती झूम-झूम गाएँ,

मित्रों संग खुशियाँ मनाएँ।

महिलाएँ थाल सजा कर आईं,

गुझिया-मिठाई सबको खिलाईं।

पुरुष भी हँसी-ठिठोली में,

रंग लगाएँ प्रेम की टोली में।

बुज़ुर्गों का आशीष पाकर,

सब झुक जाएँ चरण छूकर।

उनकी सीख सदा अपनाएँ,

सत्य-प्रेम के रंग सजाएँ।

आओ मिलकर होली मनाएँ,

भेदभाव सब दूर भगाएँ।

छोटे-बड़े सब एक हो जाएँ,

रंगों में खुशियाँ भर जाएँ।

🎶 गीत 🎶

होली आई रे, होली आई,

रंगों की खुशबू संग मुस्कान लाई।

बच्चे, बूढ़े, नर-नारी,

सब खेलें मिलकर होली प्यारी।

ढोल बजे और गाना गाएँ,

रंग-गुलाल सब पर उड़ाएँ।

हँसी-खुशी का मेला सजाए,

प्रेम का दीप दिलों में जलाए।

होली आई रे, होली आई,

हर दिल में नई उमंग जगाई।

कार्तिक कुमार

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