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नए –नए वृक्ष लगाना है – धीरज कुमार
मानव जीवन हमने पाया, बुद्धि का मिला खज़ाना है,
तो वसुधा को दूषित होने से, हमको ही तो बचाना है।
निर्मल, शीतल सी वायु का सबको अधिकार दिलाना है,
परिवेश सुरक्षित रखना है, तो नए–नए वृक्ष लगाना है।
ये वृक्ष नहीं साधारण है, सबको ही जीवन देता है।
लेता है ख़ुद दूषित वायु, पर हमें ऑक्सीजन देता है।
इससे चलता सबका जीवन, पर उपकारी का भाव नहीं,
फिर ऐसे दानी पेड़ से है, तुमको थोड़ा क्यों लगाव नहीं।
ना हरे पेड़ को काटो कभी, और कटने से भी बचाना है,
परिवेश सुरक्षित रखना है तो नए–नए वृक्ष लगाना है।
देती है छाया गर्मी में, देते हैं लकड़ी और फल भी,
हैं आयुर्वेद का ये आधार, ये आज भी देंगे और कल भी,
इनको बस देने से मतलब, ना ख़ुद कभी कुछ भी मांगते हैं,
जीवन में भी काम आते हैं, मृत्यु पाकर भी बांटते हैं।
तो करो प्रतिज्ञा जन्मदिवस पर ये उपहार सजाना है,
परिवेश सुरक्षित रखना है तो नए–नए वृक्ष लगाना है।
इससे बढ़कर होगा क्या धन, देते हैं जीवन और भोजन,
तो सब मिलकर इनकी रक्षा का आओ करते हैं अब प्रण।
पाना है उत्तम स्वास्थ्य तुम्हें, बिन शुद्ध वायु क्या संभव है?
बिन वृक्षों के इस वसुधा पर सबका जीवन ही असंभव है।
लोगों को ज्ञान भी देना है, हरियाली को फैलाना है,
परिवेश सुरक्षित रखना है तो नए–नए वृक्ष लगाना है।
निर्मल, शीतल सी वायु का, सबको अधिकार दिलाना है,
परिवेश सुरक्षित रखना है तो नए–नए वृक्ष लगाना है।
धीरज कुमार प्रधान शिक्षक
प्रा० वि० मुशहर मुस्तफापुर, प्रखंड: कांटी, मुजफ्फरपुर

