आत्मचिंतन से निकली ऊर्जा ज़ब भोग का नाश कराती है । तभी योग उमड़ता जीवन में , यह शरीर से[...]
शशि नभ मंडल, आए कैसे-राम किशोर पाठकशशि नभ मंडल, आए कैसे-राम किशोर पाठक
शशि नभ मंडल, आए कैसे? नित छवि नूतन, पाए कैसे? हरपल शीतल, दे अंजोरा। तन रखता निज, गोरा-गोरा।। हम सबका[...]
गर्मी आई-ब्यूटी कुमारीगर्मी आई-ब्यूटी कुमारी
गर्मी आई लू बरसाई , सूरज की तेज तपिश । धरती पर छाई लू की कहर, निकल ना पाते घर[...]
प्रज्ञा निखार- राम किशोर पाठकप्रज्ञा निखार- राम किशोर पाठक
ले ली है अब अपनी, प्रज्ञा निखार। रहते हैं हम होकर, सबसे उदार।। क्षमा दान दूँ अब, तजकर विलाप। रखना[...]
पावस-राम किशोर पाठक पावस-राम किशोर पाठक
नैन व्यथित थें दर्श हुआ है। मिलकर मुझको हर्ष हुआ है।। अब पूनम सी लगे अमावस। क्या सखि? साजन! न[...]
हमें करना है प्रेम-राम किशोर पाठक हमें करना है प्रेम-राम किशोर पाठक
हमें करना है प्रेम। करे जो सबका क्षेम।। कुटिल कुत्सित सह क्रूर। हुए सब हमसे दूर।। नहीं प्रेमिल सहवास। नहीं[...]
बाल श्रम नहीं, पढ़ने की उम्र है-राहुल कुमार रंजनबाल श्रम नहीं, पढ़ने की उम्र है-राहुल कुमार रंजन
खेलने-कूदने की उम्र है, अभी बढ़ने दो, नन्हे हाथों में काम नहीं, सपने रहने दो। कंधों पर बस्ते सजने दो,[...]
हितोपदेश-गिरीन्द्र मोहन झाहितोपदेश-गिरीन्द्र मोहन झा
कर्त्तव्यपरायण और व्यवहारकुशल बनना, स्वयं के प्रति सत्यनिष्ठ-ईमानदार बनना, निरंतर सीखना, जिज्ञासु बनना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखना, प्रगति के लिए सदा[...]
पिता-रूचिकापिता-रूचिका
पिता एक सुरक्षा कवच इस समाज में जो ढाल बन जाते हर मुश्किल में। पिता मार्गदर्शक एक सलाहकार जो सही[...]
जीना तो इसी का नाम है-गिरीन्द्र मोहन झाजीना तो इसी का नाम है-गिरीन्द्र मोहन झा
कर्त्तव्यपरायण और व्यवहारकुशल बनें हम, सदा-सर्वदा स्वयं के प्रति ईमानदार बनें हम, जीना इसी का नाम है। प्रगति पथ पर,[...]
