पितृपक्ष के भाव- अमरनाथ त्रिवेदीपितृपक्ष के भाव- अमरनाथ त्रिवेदी

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पितृ पक्ष के भाव जिनमें  है पिता की भक्ति ,वही तो पितृ तर्पण करते ।अपने उर में श्रद्धा लेकर ,वही [...]

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Girindra Mohan Jha

जाति वर्ण – गिरींद्र मोहन झाजाति वर्ण – गिरींद्र मोहन झा

0 Comments 3:45 pm

भिन्न-भिन्न जाति, सम्प्रदाय,भिन्न-भिन्न वर्ण और समुदाय,भाषा, राज्य, प्रांत और वतन,भिन्नता सबमें, पर है एक धरम,भिन्न-भिन्न भले सबकुछ, सब असमान,पर एक[...]

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युग का प्रभाव- जैनेन्द्र प्रसाद रवियुग का प्रभाव- जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 3:24 pm

गुरुजनों की भी नहीं,छूते हैं चरण कभी,कहीं दूर जाने वक्त, कहते हैं गुड-वाय। बड़ों को प्रणाम हेतुजोड़ते हैं हाथ नहीं,एक[...]

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अब भी यूं रुका क्यों है -डॉ स्नेहलता द्विवेदीअब भी यूं रुका क्यों है -डॉ स्नेहलता द्विवेदी

0 Comments 9:12 pm

तू अब भी यूँ रुका क्यूँ है? गुलाब कांटों से यूँ लगा क्यूँ है ? जिंदगी तेरा ये फ़लसफ़ा क्यूँ[...]

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Ram Kishor Pathak

देश हमारा -राम किशोर पाठकदेश हमारा -राम किशोर पाठक

0 Comments 8:52 pm

देश हमारा हरपल आगे। भारत वासी जब-जब जागे।। आदर देते हम-सब आएँ। भारत माँ की जय-जय गाएँ।। देव यहीं भूतल[...]

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Girindra Mohan Jha

पेड़- गिरीन्द्र मोहन झापेड़- गिरीन्द्र मोहन झा

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पेड़ बीज को अंकुरित होने में भी लगता है संघर्ष, पौधे धीरे-धीरे बढ़कर हो जाते हैं पेड़, यह पतझड़-वसंत-ग्रीष्म-वृष्टि-शीत, सबको[...]

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महामानव -जैनेंद्र प्रसादमहामानव -जैनेंद्र प्रसाद

0 Comments 6:53 pm

महामानव पाकर भी ऊँचा पद- मिलता नहीं है यश, कई ऐसे गुमनाम, होते हैं यहांँ इंसान। घर से निकल कर-[...]

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Ram Kishor Pathak

हिंदी भाषा की गरिमा – राम किशोर पाठकहिंदी भाषा की गरिमा – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:23 pm

हिंदी भाषा की गरिमा को, उच्च शिखर पहुँचाना होगा। हिंदी के प्रति जन-मानस में, प्रेम अटूट जगाना होगा।। रामचरित रचकर[...]

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