वृक्ष मेरे मित्र अनोखे,
हमें जीवन की सौगात दिये हैं ।
रहे मौन सदा, नही कोई शिकायत,
बदले में सब अपशिष्ट लिये हैं ।
परिवार का रूप है ये पेड़,
अचल, शांत, स्थिर है जमीं पर ।
स्वयं में गुणों की खान समेटे,
जो सबको छाया देते हैं ।
वृक्ष मेरे मित्र अनोखे,
धरती को खुशहाल किये हैं ।
प्राणवायु के पोषक ये है,
सुखी जीवन मिलती इनसे है।
वृक्ष कहलाते पुत्र समान,
इससे न अब है कोई अनजान ।
आओ मिलकर हम वृक्ष लगाएँ,
धरती को हरित स्वर्ग बनाए ।
आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार

