रटते आए बचपन से हम,
एएम और पीएम का क्रम।
लातीनी भाषा से जन्मे,
एंटी और पोस्ट मेरिडियम।
दोपहर से पहले, दोपहर के बाद,
यही सिखाता हमको पाश्चात्य स्वाद।
पर मन में उठता एक सवाल,
किसके पहले, किसके बाद का है यह काल?
तभी संस्कृति की खिड़की खुलती है,
सत्य की अनुपम आभा ढुलती है।
संस्कृत के सागर से उठती तरंग,
दिखाती काल का एक नया रंग।
‘मार्तण्ड’ यानी सूर्य देव का नाम,
जिनसे चलता सृष्टि का सारा काम।
जब भोर भये सूरज चढ़ता है,
गगन मार्ग पर आगे बढ़ता है।
वह ‘आरोहणम् मार्तण्डस्य’ कहलाए,
जिसको दुनिया ‘AM’ कहकर गाए।
मध्याह्न ढले जब तेज घटे,
सूरज का रथ पश्चिम की ओर हटे।
वह ‘पतनम् मार्तण्डस्य’ का रूप हुआ,
संसार के लिए जो ‘PM’ का स्वरूप हुआ।
पाश्चात्य सोच ने नाम बदला,
पर सत्य सनातन का कभी न ढला।
चाहे भाषा की हो कोई भी जंग,
पर प्रकृति चलती वेदों के संग।
सूरज का चढ़ना, सूरज का ढलना,
यही है समय का असली बदलना।
धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
प्राथमिक विद्यालय रेही टोला रानीगंज

