करवाचौथ चलनी चमकदार हे। हे बहिना पिया करै छी करवाचौथ त्योहार हे, भैर दिन राएख केअ उपवास हे ना। पिया[...]
वृद्धावस्था-गिरींद्र मोहन झावृद्धावस्था-गिरींद्र मोहन झा
वृद्धावस्था (कविता: गिरीन्द्र मोहन झा) शैशव, बाल्य, किशोर, युवा, से होकर तुम बने हो वृद्ध, तुम्हारा असली,बड़ा गुण है, हर[...]
ज्ञान का दीपकज्ञान का दीपक
ज्ञान का दीपक 5 अक्टूबर 2025 से विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर कार्तिक कुमार मध्य विद्यालय कटरमाला गोरोल[...]
मौन हैमौन है
मौनम् कः अद्य दुःखितः? यस्य जीवनं योगः, संविधानम्, स्वर्वेदः च मौनम् अस्ति। साधना, सेवा, सत्सङ्गः अद्य सर्वेषु मौनम् अस्ति।[...]
कष्ट – बैकुंठ बिहारीकष्ट – बैकुंठ बिहारी
कष्टबाल्यावस्था से ही यह माया,किशोरावस्था में भी, न छोड़ती किसी की काया,कभी कुछ खोने का कष्ट,कभी कुछ छूटने का कष्ट,कष्ट[...]
आओ मिश्रण को अलग करे- अवधेश कुमारआओ मिश्रण को अलग करे- अवधेश कुमार
: विज्ञान कविताआओ मिश्रण को अलग करे,ये पहल सब मित्रों से करें ।क्योंकि मिश्रण में छिपा है विज्ञान ,इसमें छिपा[...]
चौसर – रुचिकाचौसर – रुचिका
चौसर जिंदगी के चौसर पर हम रहेंबस एक मोहरेंचाल ऊपर वाला चलता रहा।कभी शह, कभी मात वह देताऔर दर्प इंसानों[...]
धूप कहां देखती अपना घर- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानधूप कहां देखती अपना घर- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
मदिरा सवैया211-211-211-211=211-211-211-2 धूप कहाॅं दिखती अपना घर। काॅंप रही किरणें अब ऑंगन,देख प्रभा यह पस्त हुई।गर्म हवा अब भाग रही[...]
दस्तूर दुनिया की- विधाता छंद मुक्तक- राम किशोर पाठकदस्तूर दुनिया की- विधाता छंद मुक्तक- राम किशोर पाठक
विधाता छंद मुक्तक जिसे रोना नहीं आया उसे कोई नहीं समझा।गमों के दौर से बोलो नहीं वह कौन जो उलझा।सदा[...]
Don’t want to be a Poet – Avdhesh kumarDon’t want to be a Poet – Avdhesh kumar
Don’t Want to Be a PoetI don’t want to be a poet now,I want to be a reader first .My[...]
