शिक्षा का मंदिर न्यारा है,
ज्ञान जहाँ का उजियारा है।
यहाँ संस्कारों की गंगा बहती,
जीवन की हर राह सँवरती।
कक्षा-कक्षा दीप जलाते,
गुरुजन हमको राह दिखाते।
पुस्तक में संसार समाया,
ज्ञान ने मानव को ऊँचा बनाया।
अक्षर-अक्षर मोती बनते,
मेहनत से सपने सच होते।
यहीं सीखते प्रेम और सेवा,
यहीं मिलता जीवन का मेवा।
विद्यालय की शान निराली,
बच्चों की हँसी लगे मतवाली।
आओ मिलकर प्रण दोहराएँ,
शिक्षा का सम्मान बढ़ाएँ।
ज्ञान, चरित्र और अनुशासन से,
भारत का गौरव बढ़ाएँ।
गीत: “शिक्षा का मंदिर प्यारा है”
मुखड़ा
शिक्षा का मंदिर प्यारा है,
ज्ञान का दीप उजियारा है।
गुरुजन देते नई दिशा,
यही हमारा सहारा है॥
अंतरा 1
किताबों में सपने सजते,
मेहनत से जीवन सँवरते।
अज्ञान का अँधियारा मिटे,
ज्ञान के सूरज निखरते।
सच्चाई का यह द्वारा है,
ज्ञान का दीप उजियारा है॥
अंतरा 2
यहाँ प्रेम और सेवा सीखें,
मिल-जुलकर आगे बढ़ना सीखें।
देश-धर्म का मान बढ़ाएँ,
सद्गुण अपने जीवन में लिखें।
संस्कारों का धारा है,
ज्ञान का दीप उजियारा है॥
अंतरा 3
गुरु चरणों का मान करें हम,
विद्यालय का सम्मान करें हम।
पढ़-लिखकर भारत को सजाएँ,
नित नव निर्माण करें हम।
भविष्य का यह सितारा है,
ज्ञान का दीप उजियारा है॥
समापन
शिक्षा का मंदिर प्यारा है,
ज्ञान का दीप उजिiयारा है।
गुरुजन देते नई दिशा,
यही हमारा सहारा है॥
कार्तिक कुमार

