कारक चिह्न समझो प्यारे – कार्तिक कुमार
कारक के चिह्न समझो भाई,
कार्तिक सर ने बात बताई।
कर्ता बोले ‘ने’ पहचानो,
राम ने आम खाया जानो।
सीता ने गीत सुनाया,
‘ने’ ने कर्ता समझाया॥
कर्म कहे ‘को’ मेरे भाई,
माँ ने मोहन को आवाज लगाई।
गुरुजी ने बच्चे को पढ़ाया,
‘को’ ने कर्म हमें समझाया॥
करण कहे ‘से’ पहचानो,
कलम से हम लिखना जानो।
चाकू से फल काटें हम,
‘से’ है साधन, याद रखें हम॥
संप्रदान ‘को, के लिए’ आए,
माँ ने बच्चे के लिए फल लाए।
पिताजी ने रीना को खिलौना दिया,
देने का भाव यहाँ दिखा॥
अपादान कहे ‘से’ भाई,
पेड़ से पत्ता नीचे आई।
घर से बच्चा स्कूल गया,
अलग होने का भाव हुआ॥
संबंध ‘का, के, की’ बतलाए,
राम का बस्ता, मोहन की किताब आए।
बच्चों के सुंदर खिलौने,
रिश्ते वाले शब्द हैं सोने॥
अधिकरण ‘में, पर’ कहलाए,
किताब मेज पर रखी जाए।
बच्चे कक्षा में पढ़ते हैं,
स्थान का भाव यहाँ कहते हैं॥
संबोधन ‘हे, अरे, ओ’ प्यारा,
हे भगवान! ओ बच्चा हमारा।
अरे मोहन! इधर तो आओ,
बुलाने का भाव समझ जाओ॥
आठों कारक याद करो,
हँसते-हँसते अभ्यास करो।
ने, को, से, के लिए,
का-के-की, में-पर लिए।
हे-अरे-ओ पुकार सुनाएँ,
कारक ज्ञान सदा अपनाएँ॥
नाम: कार्तिक कुमार
विद्यालय: मध्य विद्यालय कटरमाला, गोरौल, वैशाली
मोबाइल: 7004318121
ई-मेल: kartikyog.kumar@gmail.com

