पद्धरी छंद सम-मात्रिक छंद, 16 मात्राएँ आरंभ द्विकल से, पदांत Sl अनिवार्य। मां सिद्धिदायिनी दिव्य भाल। दिखते हैं सागर[...]
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वंदनवार सजे शारदा – कुंडलिया छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’वंदनवार सजे शारदा – कुंडलिया छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
पेड़ लगा मां के नाम से, होंगे जग में नाम। उनके ही नेपथ्य में, पाना चिर विश्राम।। पाना चिर विश्राम,[...]
देश हमारा -राम किशोर पाठकदेश हमारा -राम किशोर पाठक
देश हमारा हरपल आगे। भारत वासी जब-जब जागे।। आदर देते हम-सब आएँ। भारत माँ की जय-जय गाएँ।। देव यहीं भूतल[...]
पेड़- गिरीन्द्र मोहन झापेड़- गिरीन्द्र मोहन झा
पेड़ बीज को अंकुरित होने में भी लगता है संघर्ष, पौधे धीरे-धीरे बढ़कर हो जाते हैं पेड़, यह पतझड़-वसंत-ग्रीष्म-वृष्टि-शीत, सबको[...]
हिंदी – गिरिधर कुमारहिंदी – गिरिधर कुमार
हिंदी हिन्द की आवाज, प्राकृत, पाली, संस्कृत से क्रमशः निःसृत, भारतीयता की पहचान हिंदी। भारतेंदु से पंत तक,[...]
हिंदी हैं हम – आशीष कुमार पाठकहिंदी हैं हम – आशीष कुमार पाठक
हिंदी हैं हम हिंदी हमारी वेदना हिंदी हमारी गान हिंदी हमारी आत्मा यह देश की हर तोतली आवाज हिंदी[...]
स्कूल कितना जरूरी है – अमृता कुमारीस्कूल कितना जरूरी है – अमृता कुमारी
स्कूल कितना जरूरी है! यह स्वतंत्र हंसी ये आंखों की चमक बता रही है कि… लड़कियों के लिए स्कूल[...]
मित्र की मित्रता – राम बाबू राममित्र की मित्रता – राम बाबू राम
मित्र की मित्रता मित्र की मित्रता है सबसे प्यारी, मित्र है तो जग न्यारी। मित्र है तो खुशियां[...]
रसीले फल – राम बाबू रामरसीले फल – राम बाबू राम
रसीले फल आम फलों का राजा है, रस से भरा रसीला है। लीची खट्टी मीठी है, यह हम[...]
एक पौधा लगाऊंगा – राम बाबू रामएक पौधा लगाऊंगा – राम बाबू राम
एक पौधा लगाऊंगा एक पौधा लगाऊंगा, उसमें रोज पानी डालूंगा। जंगल-झाड़ काटकर, साफ-सुथरा रखूंगा, जब पौधा बड़ा हो जाए,[...]
