वहाँ कृष्ण है – शरद कुमार वर्मा


Sharad Kumar Verma

वहाँ कृष्ण है – शरद कुमार वर्मा

जहाँ स्वयं पर विश्वास है वहाँ कृष्ण है ।
जहाँ मानवता आसपास है वहाँ कृष्ण है॥

कृष्ण मुरली की सुरीली तान है।
कृष्ण मासूम चेहरे की मधुर मुस्कान है॥

कृष्ण वह है जो सुदामा का मित्र है।
कृष्ण वह है जो करुणा का चित्र है॥

कृष्ण रिमझिम फुहार है़ सावन का गीत है।
कृष्ण नटखट है चितचोर है़ मन का मीत है॥

कृष्ण निश्छल प्रेम का दूसरा नाम है।
कृष्ण दोपहर के बाद शीतल शाम है॥

कृष्ण समंदर भी है गगरी भी है।
कृष्ण अनुपम भक्ति की नगरी भी है॥

कृष्ण हृदय का उत्तम विचार है।
कृष्ण सत्कर्म की ओर बढ़ने का द्वार है॥

कृष्ण कभी माँ के अधरों की हंसी है।
कृष्ण घर -आंगन की चहकती खुशी है ॥

कृष्ण हिम्मत है़ ताकत है़ विश्वास है़।
कृष्ण हर टूटे हुये हृदय की आस है़॥

कृष्ण राजा है़, कृष्ण सारथी है़,
कृष्ण ही गोकुल का ग्वाला है़।
कृष्णमय है़ यदि अंतर्मन
तो हर ओर भोर का उजाला है़॥

शरद कुमार वर्मा ,
शिक्षक, रेलवे हायर सेकेंड्री स्कूल,
चारबाग, लखनऊ ( उ. प्र.) मोबाइल नं. 9838214110

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