जिद हमने छोड़ी – ज्योत्सना वर्द्धन


Jyotsana Vardhan

जिद हमने छोड़ी – ज्योत्सना वर्द्धन

जो नहीं उसे पाने की जिद है मुझे,
रोज़-रोज़ आईने से टकराने की जिद है मुझे।

ज़िंदगी को रास नहीं आ रही,
हमारी खुशियाँ जाने कहाँ खो रही।

मैं सुलझाने चली अपने मसले,
कहीं मुकम्मल रास्ते मिल सकें।

मेरे बारे में कुछ भरम है लोगों को,
उन्हें खत्म करने की जिद छोड़ दी मैंने।

माना ये आखिरी सच नहीं,
अपने अश्कों से सीखा है मैंने,
साथ कोई नहीं देता है।

दिल कहाँ समझता है ये दुनियादारी,
इस नादा को समझाने की जिद हमने छोड़ी।

एक बच्चे सा दिल को रुलाता है कोई,
उसे पाने की जिद हमने छोड़ी।

अकेले रहकर मुस्कुरा लेती हूँ,
उससे दूर जाने की जिद छुपा लेती हूँ।

तोड़कर तारों को ज़मीन पर लाने की जिद,
तोड़कर तारों को ज़मीन पर लाने की जिद हमने छोड़ी।

जो नहीं उसे पाने की जिद हमने छोड़ी,
रोज़-रोज़ आईने से टकराने की जिद हमने छोड़ी।

ज्योत्सना वर्द्धन
उत्क्रमित मध्य विद्यालय पहाड़ चक, मोतीपुर, मुजफ्फरपुर।

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