संस्मरण गीत – राम किशोर पाठक चंद पैसों में भली वह, जिंदगी जीते हुए। आ रही है याद[...]
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तुम मुझको नारी रहने दो… डॉ स्वराक्षी स्वरातुम मुझको नारी रहने दो… डॉ स्वराक्षी स्वरा
गीततुम मुझको नारी रहने दोअपनी अधिकारी रहने दो ।। सत्ता का लोभ नहीं मुझकोन दौलत की ही चाहत है पैरों [...]
चुनावी जुमले बाज़ी – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’चुनावी जुमले बाज़ी – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
चुनावी जुमले बाज़ी जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ जंगल राज कह कर सबको डराते हैं, विकास-भ्रष्टाचार के, मूद्दे हुए गौण है।[...]
आमोद हारी मुरारी- सर्वगामी/ अग्र सवैया छंद – राम किशोर पाठकआमोद हारी मुरारी- सर्वगामी/ अग्र सवैया छंद – राम किशोर पाठक
आमोद हारी मुरारी- सर्वगामी/ अग्र सवैया छंद – राम किशोर पाठक आमोद हारी मुरारी सुनो भक्त का, भक्त[...]
राष्ट्रीय एकता दिवस – राम किशोर पाठकराष्ट्रीय एकता दिवस – राम किशोर पाठक
राष्ट्रीय एकता दिवस दिवस राष्ट्रीय एकता वाला। लेकर समरसता का माला।। आओ इसकी कथा सुनाएँ। सरदार पटेल से मिलवाएँ।।[...]
बारिश और पकौड़े : बाल कविता – अवधेश कुमारबारिश और पकौड़े : बाल कविता – अवधेश कुमार
बारिश और पकौड़े : बाल कविता – अवधेश कुमार बाहर हो रही थी झमाझम बारिश, मन मे हो रही[...]
धूप कहां देखती अपना घर- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानधूप कहां देखती अपना घर- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
मदिरा सवैया211-211-211-211=211-211-211-2 धूप कहाॅं दिखती अपना घर। काॅंप रही किरणें अब ऑंगन,देख प्रभा यह पस्त हुई।गर्म हवा अब भाग रही[...]
शरद पूर्णिमा – गिरीन्द्र मोहन झाशरद पूर्णिमा – गिरीन्द्र मोहन झा
शरद पूर्णिमा की रात सुहावन, है अति मनभावन, चंद्रमा की चांदनी, उजाला, शीतलता, है अति पावन, चंद्रदेव अमृत-वृष्टि हैं कर[...]
जीवन सुंदर सरस – महामंगला छंद गीत, राम किशोर पाठकजीवन सुंदर सरस – महामंगला छंद गीत, राम किशोर पाठक
जीवन सुंदर सरस, लगता हरपल खास। कर्म करे जो सतत, होता नहीं उदास।। हारा मन कब सफल, मन के जीते[...]
शरद पूर्णिमा, रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’शरद पूर्णिमा, रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
विधाता छंदधारित मुक्तक शरद पूर्णिमा कहीं संगम कहीं तीरथ, धरा पर पुण्य बहते हैं, मगर जो आज देखेंगे, कहेंगे व्यर्थ[...]
