नारी तुम अभिमान करो – डॉ उषा किरण
बलवती तेरी चूड़ियाँ,
नूपुर करते प्राण संचार।
नारी तुम ही नारायणी,
तुम ही शक्ति अवतार।
तुम ही रूप प्रकृति,
तुम ही जगत आधार।
तुम ममता वत्सला,
तुम ही सींचती संसार।
नैनो में करुणा केवल,
सुधा आँचल की छांव।
कितने रूपों में पाता जग,
पावन, निर्मल तेरे भाव।
कर्म तेरा बस जग को देना,
पाया क्या अब तक तूने?
अपमान, उपेक्षा तो छोड़ो,
कितने हाथ बढ़े आँचल छूने!
बेरी उसने ही डाली,
लाई जिसको संसार में तू!
बन गया तेरा खेवन हार,
और रही मझधार में तू!
नीति-रीति की डोर बँध,
परंपराओं की बलि चढ़ी।
धर्मशास्त्र की सूक्तियों में,
सिद्ध – निषिद्ध की सूली चढ़ी।
भोर हुई जागो तुम,
आँखों से दूर बिहाग करो।
चलो सवारो तुम निज को,
स्वयं पर अनुराग करो।
तुम नारी हो नारी ही रहना,
मत खोना अपनी पहचान।
तेरे ही दिव्य गुणों से,
जगमग होने दो जहान।
उठो सृजन को नव अध्याय,
स्वयं में स्वाभिमान भरो।
नारीत्व तुम्हारा गहना है,
इसका तुम अभिमान करो।
स्वरचित
डॉ उषा किरण
प्रधान शिक्षक
Nps बवरिया
पहाड़पुर, पूर्वी चम्पारण

