ताजा तरीन गज़ल – रखशां हाशमी
है अंधेरों में रौशनी उम्मीद
सच में होती है जिंदगी उम्मीद
आस जब जब लगायी अपनों से
हमने देखी है टूटती उम्मीद
हम बड़े एैतमाद से टूटे
थी हमें आप से बड़ी उम्मीद
आस शीशा नहीं है पत्थर है
मेरी टूटी नहीं अभी उम्मीद
एक इमकान हो गया रौशन
जगमगाई गली गली उम्मीद
आखिरी तीर तू ही तरकश का
बस तू ही मेरी आखिरी उम्मीद
दिल का रखना भी इक इबादत है
तोड़ना मत कोई कभी उम्मीद
फिर से सूरज नया तुलूअ हुआ
नींद टूटी जगी नयी उम्मीद
आने वाला है वो अयादत को
आखिरी वक्त आखिरी उम्मीद
ना उम्मीदी तो कुफ्र है रखशां
और खुदा की है बंदगी उम्मीद
रखशां हाशमी
बोधगया गया जी
मोबाइल 9304342562

